पूरे उत्तर प्रदेश वासियों के लिए एक जरूरी सूचना है बता दे कि उत्तर प्रदेश में खेती की जमीन पर घर बनाने से पहले अब एनओसी यानी अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना पड़ेगा। दरअसल आपको बता दें कि शहरों में अवैध प्लाटिंग से बसने वाली कॉलोनियों पर रोक लगाने के लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार खेती की जमीन को आवासीय  करने से पहले अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य हो जाएगा। इसके लिए तैयारी शुरू हो चुकी है। उच्च अधिकारियों की बैठक में इस पर सहमति भी बन गई है।

उच्च अधिकारियों की बैठक में बानी सहमती 

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि प्रमुख सचिव आवास के अध्यक्षता में इस को लेकर बैठक हुआ था बैठक में लखनऊ विकास प्राधिकरण के तरफ से सुझाव दिया गया कि राजस्व संहिता की धारा 88 के तहत कृषि भूमि को अकृषिक भूमि घोषित करने से पहले प्राधिकरण से एनओसी लेना अनिवार्य कर दिया जाएगा।इस फैसले से शहरों में खेती की जमीन पर होने वाली अवैध प्लाटिंग पर रोक लगेगी और किसानों का शोषण भी नहीं होगा।बता दें कि अलीगढ़ विकास प्राधिकरण ने जानकारी दिया है कि राजस्व संहिता में खेती की जमीन को आवासीय बनाने का प्रावधान है इसलिए अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने की प्रक्रिया को अनिवार्य करने में कोई विधिक बाधा नहीं आएगी इसके आधार पर तय किया गया है कि जल्द ही शासनादेश जारी करते हुए सभी जिला अधिकारियों को इस संबंध में विस्तृत आदेश भेजेगा।

एनओसी विकास प्राधिकरण देने से पहले करेंगे स्थलीय सर्वे

मूलभूत सुविधा पर ही एनओसी विकास प्राधिकरण देने से पहले स्थलीय सर्वे करेंगे और उनके द्वारा देखा जाएगा कि कितनी जमीन कृषि से गैर कृषि घोषित हो रही है इसका मकसद क्या है खेती की जमीन पर अगर कॉलोनी बसाई जा रही है तो इसका लेआउट पास कराया गया है या नहीं। यही नहीं मौके पर मानक के अनुसार मूलभूत सुविधाएं दी जा रही है या नहीं अगर ऐसा नहीं किया जा रहा है तो एनओसी नहीं दिया जाएगा। ऐसी स्थिति में तहसीलों में खेती की जमीन को गैर कृषि घोषित नहीं किया जाएगा।

राजस्व संहिता में है यह व्यवस्था

आपको बता दें कि अगर कोई अपनी जमीन को अकृषिक घोषित करवाना चाहता है तो उसे यूपी की राजस्व संहिता की धारा 80 के तहत प्रपत्र आरसी 25 पर उप जिला अधिकारी के पास आवेदन करना पड़ता है सर्किल रेट के अनुसार इसके लिए आगणिक मूल्य का एक फिसदी मूल्य देना होता है। बता दे कि आवेदन प्राप्त होने के बाद उप जिला अधिकारी किसी राजस्व अधिकारी के द्वारा इसका जांच करवा कर पता लगाता है कि संबंधित भूमि का उपयोग वास्तव में कृषि सेवा लक किसी अन्य प्रयोजन के लिए हो रहा है या नहीं और रिपोर्ट मिलने के बाद ही उप जिलाधिकारी स्तर से इस पर निर्णय लिया जाता है।

Rajan Sharma

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