भारत में बिजली और डीजल से नही बल्कि अब हाइड्रोजन से चलेंगी ट्रेने, साल 2023 से होगी शुरुआत, सबसे पहले इस रुट पर होगा संचालन

भारत में अभी तक ट्रेनों का संचालन तेल और बिजली से होती है लेकिन जल्द ही हवा यानी गैस से चलने वाली ट्रेने चलाई जाएंगी। मीडिया खबर के अनुसार , रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव के अनुसार साल 2023 से भारत में हाइड्रोजन गैस से ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। हाइड्रोजन गैस से चलने वाली ट्रेनों का नाम बंदे मेट्रो ट्रेन दिया गया है।

मई-जून 2023 तक डिज़ाइन आएगा सामने

भारत में इन ट्रेनों का विकास किया जा रहा है इसका डिज़ाइन भारतीय इंजीनियरों के द्वारा किया जा रहा है जो पूरी तरह स्वदेशी होंगी। ये ट्रेने डिजल और बिजली से नहीं बल्कि हाइड्रोजन से चलेंगी। यह ट्रेन धुएं की वजाय पानी छोड़ेगी। इसका मतलब कि इन ट्रेनों के चलने से ईंधन की बचत होगी और प्रदुषण से भी राहत मिलेगी। रेलमंत्री के बताने के अनुसार साल 2023 से हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेने तैयार हो जायेंगी और इसका डिज़ाइन मई-जून 2023 तक सामने आने की उम्मीद है।

 

सबसे पहले किस रुट पर होगा संचालन 

रेलमंत्री के अनुसार भारत में इन ट्रेनों का फोकस मध्यम वर्गीय लोगो पर होगा। खबर यह भी मिल रही है कि इन ट्रेनों को सबसे पहले सोनीपत-जिंद रुट पर चलाया जा सकता है। आपको बता दें कि इसके लिए दो डेमू ट्रेनों में हाइड्रोजन फ्यूल सेल लगाने का काम शुरू हो चूका है। इसका ठेका भारतीय कंपनी को दिया गया है इसमें लगभग 70 करोड़ रूपये खर्च होंगे। माना जा रहा है कि शुरुआत में हाइड्रोजन ट्रेनों का खर्च अधिक होगा लेकिन 2 साल के भीतर इसकी भरपाई भी हो जाएगी। आपको बता दें कि 1 किलो हाइड्रोजन करीब-करीब 4.5 लीटर डीजल के बराबर माइलेज देगा। हाइड्रोजन ट्रेन डेमू ट्रेनों के मुकाबले सालाना ढाई करोड रुपए की बचत करेगी। कार्बन उत्सर्जन को भी ये ट्रेने 11 मिट्रिक टन कम कर देंगी।

 

सबसे पहले जर्मनी में हुई थी शुरुआत 

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि सबसे पहले जर्मनी में हाइड्रोजन ट्रेनों की शुरुआत हुई थी। साल 2022 के अगस्त महीने में 14 हाइड्रोजन ट्रेनों को को जर्मनी में लॉन्च किया गया है। सभी ट्रेनों में हाइड्रोजन फ्यूल सेल का इस्तेमाल किया गया है। बता दें कि ट्रेनों की छतों पर हाइड्रोजन को स्टोर किया जाता है और ऑक्सीजन से मिलने के बाद H2O यानी पानी बनाता है। इस तरह की और क्रिया में बनने वाले ऊर्जा का इस्तेमाल ट्रेनों को चलाने के लिए किया जाता है। हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन  एक बार में 1000 किलोमीटर की दूरी तय कर लेती हैं और 140 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से चलने में भी सक्षम होती हैं।

 

हाइड्रोजन ट्रेने चलने के फायदे

हाइड्रोजन ट्रेन चलने से डीजल और बिजली की बचत होगी।

लंबी दूरी के लिए इन ट्रेनों को चलाया जा सकता है।

इन ट्रेनों के चलने से जीरो प्रदूषण होगा।

हाइड्रोजन ट्रेन 15 मिनट में अधिकतम 140 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड पकड़ सकती है।

हाइड्रोजन ट्रेन इलेक्ट्रिक ट्रेनों के मुकाबले 10 गन्ना अधिक दूरी तय कर सकेंगे।

ट्रेनों में ईंधन सेल और मेंटेनेंस कॉस्ट भी कम होगा।

हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन आवाज नहीं करती हैं जिससे यात्रा आरामदायक होगा।

 

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